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सीएनटी एक्ट के बावजूद रांची के आसपास ट्राइबल जमीन पर अवैध कब्जा, संजयनाथ शाहदेव को सजा नहीं

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रांची : राजधानी रांची व उसके आसपास के इलाके में आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का खेल जारी है. सीएनटी एक्ट के बावजूद इस पर कोई रोक नहीं है. पीड़ित व्यक्ति कोर्ट-कचहरी का चक्कर काटते-काटते परेशान हो जाता है. अदालती फैसले के बाद भी जमीन पर कब्जा मिल जाए इसकी गारंटी नहीं है.

जमीन की गड़बड़ी व धोखे के कई किस्से हैं. अनगड़ा का एक दिव्यांग परिवार अपनी 12.95 एकड़ जमीन पाने के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर दो साल तक काटने के बाद भी न्याय से कोसों दूर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोनिया मुंडा के वैध वारिस को उनकी जमीन पर उनका हक जल्द से जल्द दिलाने को रांची डीसी को ट्वीट कर कहा था. मुख्यमंत्री के आदेश के आलोक में सीओ अनगड़ा ने दिव्यांग परिवार की जमीन पर दखल दिलाने की तिथि 17 फरवरी को तय की थी. इससे पहले भी अंचल कार्यलाय ने 31 जनवरी 2020 को दखल कब्जा करना तय किया था. इसके बावजूद दिव्यांग परिवार को अपनी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है.

वहीं, इस मामले में सीओ देव प्रिया ने कहा कि 17 फरवरी को पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होने की वजह से दिव्यांग परिवार को जमीन पर से अवैध कब्जा नहीं हटाया जा सकता. इसके लिए अगले सप्ताह नई तारीख तय होगी और खतियानी जमीन पर संबंधित पक्ष को कब्जा दिलाया जाएगा.

डरा हुआ है पीड़ित परिवार

रांची जिले के अनगड़ा अंचल के एक दिव्यांग परिवार मोहरी मुंडा, पति संजय मुंडा की 12.95 एकड़ जमीन हड़प ली गयी थी. परिवार अपनी जमीन पाने के लिए 2016 से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है. न्यायालय, उप समाहर्ता द्वारा भूमि वापसी के दो बार आदेश दिये जाने के बावजूद दिव्यांग परिवार को खुद की जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है.

न्यायालय उप समाहर्ता की ओर से वाद सं .132016-2017 सोनिया मुंडा वादी बनाम सुराब खां वगैरह प्रतिवाद के मामले में 25.10.2019 को पारित आदेश में खतियानी रैयत के वैध वारिसों को दखल कब्जा दिलाना.

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कब्जाधारियों के पास जमीन के दावे से संबंधित नहीं है पुख्ता कागजात

मोहरी मुंडा की खतियानी जमीन पर सुराब खां, मौजा महेशपुर खाता सं. 36 प्लांट सं. रकबा. 9.89 एकड़, राजेश गोयल एवं विरेन्द्र प्रासद पांडेय, मौजा महेशपुर खाता सं 36ए प्लॉट सं 623,626, 687, 688, 689, 690, 691 रकबा.1.10 एकड़, राजेश गोयल एवं विरेन्द्र प्रसाद पांडेय खाता सं 36ए प्लॉट सं 628ए रकबा 0.97 एकड़, नन्द लाल साहु, खाता संण्. 37ए रकबा 0.42 एकड़, मुरतफ खां, खाता नं. 37 प्लॉट नं 1517ए रकबा. 0.42 एकड़ कब्जा कर रखा है. न्यायालय में कब्जाधकरियों के द्वारा वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये जा सके हैं ।

गनी उरांव की जमीन लाल संजय नाथ शाहदेव के नाम

इसी तरह राजधानी में कई ऐसे मामले हैं जहां आदिवासी जमीन पर अलग-अलग तरीकों से कब्जा कर लिया गया. हेहल मौजा में आदिवासी गनी उरांव की जमीन की लाल संजय नाथ शाहदेव के नाम पर जमाबंदी कर दी गयी. तत्कालीन आयुक्त डॉ प्रदीप कुमार ने 20 मई 2017 को हेहल अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया था. निरीक्षण के क्रम में उन्हें जानकारी मिली कि एक आदिवासी गनी उरांव की 5.26 एकड़ जमीन को गैर कानूनी तरीके से फर्जी दस्तावेज के आधार पर गैर आदिवासी संजय साहू के नाम पर नामांतरण कर दिया गया. इनमें से 1.38 एकड़ गैर मजरूआ खाते की जमीन को लाल संजय नाथ शाहदेव के नाम से जमाबंदी कर दी गयी और लगान रसीद भी जारी कर दिया गया.

2017 के अप्रैल महीने में डीसीएलआर ने जब इस संबंध में जानकारी मांगी, तो निरीक्षण के एक दिन पूर्व यानी 19 मई को जांच प्रतिवेदन दिया. औचक निरीक्षण में इस बात का भी खुलासा हुआ कि 15 आदिवासियों के खाते की जमीन का गैर आदिवासियों के नाम से म्यूटेशन किया गया. रिकार्ड मांगने पर अंचलाधिकारी ने टाल-मटोल की. जांच में पता चला कि अंचलाधिकारी अनिल कुमार सिंह के कार्यालय में दाखिल-खारिज के 528 मामले लंबित हैं रिकार्ड मांगने पर लिंक नहीं होने का बहाना बनाया गया. ये मामला आज तक अदालतों में हैं.

जालसाज लाल संजय नाथ शाहदेव पर कई थानों में एफआइआर, पर आज तक सजा नहीं

झारखंड में माफिया किस कदर कानून से खेलते हैं उसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि आदिवासी गनी उरांव की जमीन की अपने नाम जमाबंदी कराने वाले लाल संजय नाथ शाहदेव पर राजधानी रांची के कई थानों में मामला दर्ज हुआ, लेकिन उस पर कभी आंच नहीं आयी. कुछ केस थाने के स्तर से ही डिस्पोज कर दिया गया तो कुछ अदालतों के चक्कर काट रहा है. लाल संजयनाथ शाहदेव पर रातू थाने में पार्टनर को टॉर्चर कर आत्महत्या के लिए विवश करने का केस दर्ज है. सुखदेव नगर थाने में दो एफआइआर व धुर्वा थाने में एफआइआर दर्ज है. उस पर करोड़ों की ठगी का आरोप है.

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