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यह ममता पालिटिक्स है, मिलेंगी भी, बात भी करेंगी और यूं विरोध भी जताएंगी

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ममता बनर्जी अपनी तीखी राजनीतिक शैली के लिए ख्यात है. वे भाजपा छी-छी करने वाली पहली मुख्यमंत्री हैं जो लगातार एक बड़े सूबे के शीर्ष पद पर होते हुए भी लगातार एक राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह सड़कों पर उतर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह की नीतियों के प्रति अपना विरोध जता रही हैं. आज उन्होंने दो दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंचे प्रधानमंत्री का स्वागत किया, उनसे वन-टू-वन मुलाकात भी की, उनके साथ मंच भी साझा किया और नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटिजनशिप एवं नागरिकता संशोधन कानून पर अपना विरोध भी जताया. फिर सड़क पर उतर कर प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी करने लगीं.

देश के शायद ही किसी दूसरे राजनेता में इस कदर एक दिन में इतने व्यवहारगत आयाम दिखते हों. ये चीतें ममता बनर्जी की उर्जा की ओर से तो इशारा करती हैं और अगले साल सूबे में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक तीव्रता को बनाये रखने का भी यह प्रयास है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं वर्षगांठ समारोह में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं. इससे संबंधित कार्यक्रम में दोनों नेता शामिल हुए. इस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी बोट से बेलूर मठ जा रहे थे और खुद के स्वागत के लिए सजाये गये रवींद्र सेतु यानी हावड़ा ब्रिज की सुंदरता को निहार रहे थे, उसी वक्त ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के प्रदर्शन में शामिल हो रही थीं. उधर, जाधवपुर विश्वविद्यालय के छात्र भी सीएए, एनआरसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने सड़कों पर उतरे.

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने 18 सीट जीत कर बंगाल की राजनीति में पहली बार जोरदार मौजूदगी दर्ज करायी और वह पहली बार व्यवहारिक रूप से मुख्य विपक्षी पार्टी बन गयी है, जो टीएमसी के टक्कर में है. ऐसे में ममता बनर्जी हथियार नहीं डालेंगी. वे लड़ाई को अधिक से अधिक तीखा बनाने का प्रयास करती रहेंगी. क्योंकि वे संघर्ष की राजतनीति करने वाली ममता बनर्जी सही मायने में यह जानती हैं कि लड़ना ही जिंदगी है और रुक जाना ही खत्म हो जाना है.

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