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शिक्षा मानव निर्माण का साधन है: डाॅ सुनील वर्णवाल

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बेलूर मठ के 14वें दीक्षांत में हुुए शामिल
कोलकाता: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल ने कहा है, कि शिक्षा महज पुस्तकीय या विविध ज्ञान नहीं है, बल्कि यह मानवीय निर्माण का सशक्त साधन है। जिस प्रशिक्षण द्वारा वर्तमान व इच्छा की अभिव्यक्ति को नियंत्रित कर उसका सार्थक उपयोग जगत कल्याण के लिए किया जाए, वही वास्तविक शिक्षा है। उक्त बातें डाॅ वर्णवाल ने गुरुवार को कोलकाता के बेलूर मठ में रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट की गवर्निंग बॉडी की बैठक में चांसलर नॉमिनी के रूप में दीक्षांत समारोह के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर विश्वविद्यालय के छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के ऑफ सेंटर रांची, झारखंड के भी विद्यार्थी सम्मिलित थे।
डाॅ वर्णवाल ने कहा, कि शिक्षा से चरित्र का निर्माण होता है। मन और मानस की शक्ति दृढ़ होती है, बुद्धि का विस्तार होता है व इसके द्वारा मानव स्वयं और समाज को अपने पैरों पर खड़ा करने का माद्दा रखता है। कुल मिलाकर शिक्षा से ही आदमी में पूर्णता की अभिव्यक्ति होती है। कहा कि 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद के महासमाधि का दिन था। इसी दिन स्वामीजी ने बेलूर मठ में एक विश्वविद्यालय के विचार की कल्पना की थी, यह कहते हुए कि बेलूर मठ भारतीय आध्यात्मिक विरासत व भारतीय चिंतन को की परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए वर्तमान वैज्ञानिक ज्ञान पद्धति का विश्वस्तरीय केंद्र बनेगा। स्वामी विवेकानंद की शैक्षिक दृष्टि एक अनमोल विरासत है। जिसे रामकृष्ण मिशन वास्तविक बनाने की कोशिश कर रहा है।

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डॉ वर्णवाल ने कहा की हम सबको मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए आने वाले भारत को एक समृद्ध ज्ञान संलयित आध्यात्मिक विरासत देने के लिए और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित करना होगा। हम कड़ी मेहनत करें। हमें देश के लिए जगना और जागृत होना होगा। उन्होंने कहा, कि यह पश्चिम बंगाल का पहला और एकमात्र विश्वविद्यालय है, जो प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित धर्मार्थ और परोपकारी आध्यात्मिक संगठन, रामकृष्ण मिशन द्वारा स्वामी जी के आदर्श वाक्य के साथ स्थापित किया गया है। रामकृष्ण मिशन विश्वविद्यालय के प्रायोजक समाज है, शिक्षण और अनुसंधान के साथ ही शैक्षिक प्रशासन में मामलों के शीर्ष पर समर्पित योग्य भिक्षुओं के साथ लगभग एक दशक की अल्प अवधि के भीतर स्वामी विवेकानंद के पवित्र नाम वाले इस विश्वविद्यालय ने एक छाप बनाने में सफल रहा।
डाॅ वर्णवाल ने कहा कि संस्था को शिक्षा व अन्य क्षेत्र में कार्य करने हेतु झारखंड सरकार ने वार्षिक आवर्ती अनुरक्षण अनुदान 2.94 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। रामकृष्ण मिशन को स्वामी विवेकानंद के शैक्षणिक विजन को समाज में चरितार्थ करने की ओर संघर्ष करते हुए देखना अत्यन्त ही संतोष प्रदान करता है। उन्होंने स्नातक छात्रों को भविष्य के कैरियर के लिए शुभकामनाएं दी। इस मौके पर विश्वभर के दो संगठनों के महासचिव स्वामी सुविरानंदजी, रामकृष्ण मिशन के कुलाधिपति, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलपति स्वामी अतोमानन्दजी, विश्वविद्यालय के कुलपति स्वामी अतींद्रानंदजी, स्वामी सर्वभूतेश्वरानंदजी, उपकुलपति, स्वामी अमतेश्वरानंदजी, विश्वविद्यालय के अन्य सम्मानित भिक्षु, स्टाफ के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

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