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गुमला: मुखिया की सूझबूझ व प्रशासन की मेहनत से टला नरसंहार

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घाघरा(गुमला): प्रखंड के रूकी गांव में प्रशासनिक पहल के साथ- साथ मुखिया की सूझ- बूझ से एक नरसंहार टल गया है। बताया जाता है कि कारी गांव के बिरसा उरांव अपने ससुराल गांव रुकी के जोधन उरांव के ऊपर डायन बिसाही का आरोप लगाकर रविवार की रात जान से मारने का नियत से घर मे घुस गया था, लेकिन ग्रामीणों के द्वारा हंगामा कर उसे खदेड़ दिया गया।
घटना के बाद ग्रामीणों ने रविवार को बैठक कर इस हरकत के लिए बिरसा पर 10 लाख का जुर्माना लगा दिया। इसके अलावे गांव के ही बिरसा के ससुर तेंबू को दमाद को अपने घर में रखने पर पाबंदी लगा दी गई। हालात यहां तक पहुँच गई कि गांव वालों का जोकारी गांव निवासी बिरसा उरांव के बीच तनातनी हो गई। इस बाबत मामला जान- माल के नुकसान तक पहुँच गया था, लेकिन थाना प्रभारी उपेंद्र महतो एएसआई मृत्युंजय सिंह व पंचायत की मुखिया ने समझदारी से हादसा टाल दिया।

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थानेदार उपेंद्र महतो ने पूरे मामले को लेकर कहा कि डायन बिसाही जैसे अंधविश्वास का कोई मतलब नहीं है। इसके कारण लोग आपसी लड़ाई में जान तक गंवा देते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अनुरोध किया कि ऐसे अंधविश्वास के मामले में वे ना पड़ें। मुखिया उमा देवी ने कहा कि गांव में आपसे सब आधार बनाकर रहने से ही गांव में एकजुटता आती है व आपसी लड़ाई में गांव विखंडित होता है। इसका फायदा असामाजिक लोग उठाते हैं व निर्दोश फंस जाते हैं।

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