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ग्राउंड रिपोर्ट : कोडरमा के डोमचांच में अवैध खदान संकट में धकेल रहे हैं मानव जीवन

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कोडरमा : दुनिया के नक्शे में कोडरमा अबरख नगरी के नाम से जाना जाता है. कोडरमा जिला सदियों से खनिज संपदा के मामले में धनि जिला रहा है. सन 1994 हजारीबाग जिले से कट कर अलग जिला बना ताकि हमारी संपत्ति से हम अपना विकास कर सकें और एक समृद्ध और सुखी रह सकें. पर, नियति को कुछ और मंजूर था. हम अबरख के लिए पुरे दुनिया में प्रसिद्ध थे यहाँ कई बड़े-बड़े कंपनी में अबरख का भरपूर दोहन बिहार सरकार के शासन काल से करते आया और अब अबरख बंद है.

पर, आजीविका के साधन के रूप में कोडरमा के लोगों ने पठार उद्योग को चुना और पिछले 25 सालों में पत्थर उद्योग क़ानूनी और गैर कानूनी तरीके से पूरे जिले में पाँव पसार लिया और आज कोडरमा में अवैध रूप से हजारों की संख्या में क्रशर मिल अवैध तरीके से चलाए जा रहे हैं, जिसका मुख्य केंद्र डोमचांच है. डोमचांच में अकेले लगभग 900 से अधिक क्रशर चल रहे हैं, जिसमे कई नाम शामिल हैं.

इसके अलावा कोडरमा में अवैध पत्थर खदान बड़े पैमाने पर संचालीय हो रहे हैं, जिसके कारण जिले के जलवायु में काफी परिवर्तन आया है. जिले की वर्तमान हालत यह है कि जहां डोमचांच वासियों को 15 से 20 फिट की गहराई में शुद्ध पेयजल मिल जाता था, वहीं अब हालत यह है की लोगों को 300 फिट की गहराई तक डीप बोरिंग करने के बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा है.

डोमचांच का कई ऐसे इलाके हैं जो पानी के मामले में डेंजर जोन में आने लगा है, जैसे शिवसागर, चंचाल पहाड़, नवादा, सिंघपुर, पुरनानगर, पुरनाडीह, पंचगावा, मारुती चौक के अलावा और भी इलाके हैं जहां पर पानी की किल्लत के साथ-साथ कई रोग जन्म ले रहे हैं. इन इलाकों में जहां मानव को दूषित जल मिल रहा है तो वही हवा में उड़ रहे डस्ट से गरीब मजदूर सिलोकोसिस जैस गंभीर रोग से ग्रसित हो रहे हैं. अब तक के प्राप्त आंकड़े यह बताते हैं कि 70 से अधिक पत्थर खदान अवैध रूप से संचालित किये जा रहे हैं. सबसे मजेदार बात यह कि इस अवैध काली कमाई को साफ़ करने में जिले के आला अधिकारियों की मिलीभगत है और इसमें जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं.

गिरते जलस्तर उभरते संकट

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इस तरह अवैध रूप से संचालित हो रहे खदान बड़े जल संकट की ओर मानव जीवन को धकेलने में अपना अहम भूमिका निभा रहे हैं. एक किसान रामी मेहता 65 वर्ष बताते हैं कि 25 साल पहले जब वो खेती करते थे तो उन्हें पानी की समस्या का कोई दिक्कत नहीं होता था और पैदावार भी काफी अच्छा होती थी. पर, अब हालत यह है कई फसल की खेती अब हमलोग नहीं कर पाते हैं. अब जिस तरह लोग खदान खोदते जा रहे हैं, पेड़ों की कटाई कर रहे हैं, उससे आने वाले 10 साल में पानी की गंभीर समस्या यहां के लोगों को उठानी पड़ेगा. इस समय जो लोग अवैध तरीके से पैसा पहुंचा कर खदान चलाने में लगे हैं उस समय अवैध तरीके से पैसा पंहुचा कर पानी लाने में लगायेंगे. वह आगे बताते हैं कि इधर हाल ही में डोमचांच में एक डीप बोरिंग किया गया था जो सफल नहीं रहा, यह एक संकेत है कि आने वाले वक्त में हम क्या मंजर देखने वाले हैं. डोमचांच के लोगों को अपने बच्चों के लिए कुछ छोड़ना चाहिए ताकि वह भी अपना जीवन इस शहर में जी सके.

तोड़ खाए पहाड़

डोमचांच प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित है चंचल पहाड़. यह एक धार्मिक स्थल है. आज इस पहाड़ पर भी काली नजर लग गयी है. इसे भी तोड़ा जा रहा है.

खदान में बंधुआ मजदूर करते हैं काम

डोमचांच के कई इलाके में संचालित खदान में ज्यादातर बंधुआ मजदूर काम करते हैं, उन्हें एडवांस में पैसा दे कर काम करवाया जाता है और अगर इस काम के दौरान उन मजदूरों की जान चली जाए तो यह मामले पर कोई प्राथमिकी और किसी भी खदान के ऊपर मामले दर्ज नहीं होते. अक्सर ऐसे मामले को आपस में बैठ कर लाख-दो लाख में सलटा लिया जाता है और इन मामलों में ज्यादातर अधिकारी सक्रिय नहीं होते हैं, क्योंकि क्योंकि उन्हें भी मोटी रकम मिलती है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कानून कैसे काम कर रहा है.

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